अकील राणा को बनाया जाए कांग्रेस जिलाध्यक्ष

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मज़लूमो, गरीबो व मासूमो का नेतृत्व करने वाला ही हकीकत में सच्चा रहनुमा व सियासत में ओहदों का हकदार होता है, इस बात को नकारा नही जा सकता है कि उसी के सर ताज रखा जाना चाहिए जो सियासत में मज़लूमो, गरीबो, किसानों की आवाज़ उठाता आया हो। जिसके पीछे जनता का साया हो। आज जनपद मुज़फ्फरनगर को भी विपक्ष के ऐसे ही नेता की जरुरत है, जो शासन-प्रशासन से जनता के हकों के लिए सीधे सवाल कर सकता हो, उनकी भलाई के लिए किसी भी तरह प्रशासन को राज़ी करने की काबिलियत रखता हो, सच्चाई यही है कि मुज़फ्फरनगर के गरीब, मज़दूर लोग भी विपक्ष की हर पार्टी की तरफ नज़रे गड़ाए हुए है, उनमें अपने रहनुमाओ को ढूंढने का प्रयास कर रहे है। ऐसा नही है कि जनपद में ऐसे नेता नही जो जनता के बीच रहकर उनके दुख दर्द की आवाज़ उठाते हो, हर पार्टी में मौजूद है बस पार्टी हाई कमान को उन पर गौर करने की जरूरत है। कांग्रेस ने हाल ही में प्रदेश में सभी जिलों में कार्यकारिणी भंग कर दी है, वो सभी जिलों के लिए नए चेहरों की तलाश में है। मुज़फ्फरनगर में कांग्रेस पार्टी में गरीबो के मसीहा अकील राणा को जिम्मेदारी मिलनी चाहिए, क्योकि वो जनता से सीधे जुड़कर उनके लिए हमेशा आवाज़ बुलंद करते आये है। गरीबो, मज़लूमो के दुख दर्द को महसूस कर उनकी रहनुमाई करने की काबिलियत है उनमें। उन्होंने बिना ओहदे के ही मुज़फ्फरनगर में जनता में अपना एक रुतबा कायम किया है। लगातार जनता की हितों की अनदेखी, उन पर अत्याचार, उत्पीड़न होने पर उन्होंने सड़को पर उतरकर भारी प्रदर्शन कर लोगो की आवाज़ उठाने का काम किया है। यही वजह है कि उनकी एक आवाज़ पर हजारों की भीड़ उनके पीछे खड़ी रहती है। उनका वजूद, उनकी पहचान उनका रुतबा उनके द्वारा समाजहित में किये जाने वाले कामो के कारण कायम है। बहुत लोगो का ये मानना है कि अकील राणा को कांग्रेस जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने पर बड़ी तादाद में जनपद के लोगो का रुझान कांग्रेस की तरफ स्वयं खिंचा चला आएगा और पार्टी मज़बूत होगी, क्योकि अकील राणा नाम के नही, जनता के लिए काम के नेता है।

फरमान अब्बासी लेखक

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