अब करो दुश्मन पर वार…

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बहुत सह लिया सरकार…अब करो दुश्मन पर वार…

कब तक यूं बलिदानी हों,
कब तक वही कहानी हों।
कब तक मरे जवानी हों,
कब तक आंखों में पानी हो।।
बहुत सह लिया सरकार
अब करो दुश्मन पर वार…

कब तक माताएं बिलखेंगी,
कब तक पत्नियां विलापेंगी।
कब तक यूं बहनें सिसकेंगी,
कब तक बेटियां चित्कारेंगी।।
बहुत सह लिया सरकार
अब करो दुश्मन पर वार…

जो जख्म था वो नासूर बना,
क्या दोस्ती दुश्मन समझेगा।
बस धोखा उसकी फितरत है,
पाक क्या रिश्तों को समझेगा।।
बहुत सह लिया सरकार
अब करो दुश्मन पर वार…

सुधांशु त्रिपाठी की कलम से

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