इंसानों की तरह ये शख्स लॉकडाउन में जानवरों का भी रखता है ध्यान!

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मुज़फ़्फ़रनगर: जब से लॉकडाउन हुआ है तबसे सिर्फ इंसान ही नहीं जानवर भी अपने राशन के लिए परेशान है क्योंकि पहले दुकानें खुलती थी तो इधर उधर कुत्ते, गाय या अन्य जानवर अपना पेट भर लेते थे लेकिन अब लॉकडाउन के कारण इनको अपना पेट भरने के लिए इंसानों से ज्यादा दिक्कत हो रही है क्योंकि इनके लिए पहले भी रोटी का कारण इंसान था और अब भी। जी, हम बात कर रहे हैं एक ऐसे व्यक्ति की जो हर रोज अपने मोहल्ले के सभी कुत्तों और अन्य जानवरों को दूध पिलाता है जिससे कि ऐसे समय भी वो अपना पेट भर सके और भूखे ना रहें।

ये वाकिया है मुज़फ़्फ़रनगर के सबसे चर्चित जगह खालापार का जहाँ मरकज़ फक्कर शाह चौक के पास ये बे नाम शख्स रहता है और जमात लाइन (इस्लाम के प्रचार) से जुड़ा है।

अभी न छेड़ मोहब्बत के गीत ऐ मुतरिब
अभी हयात का माहौल ख़ुश-गवार नहीं।।

जमात तो लेकर जो बात आज सामने आ रही है उसको और इस घटना को साहिर लुधियानवी के इस शेर से समझा जा सकता है। जब इससे हमने बात करनी चाही या इसको कहा कि अपना एक फोटो दे दो ये छोटी सी वीडियो बनाने दो तो इसने साफ मना कर दिया। मैने इसको बोला कि फोटो में क्या दिक्कत है तो बोला मैं ये काम अल्लाह की रज़ा (अल्लाह को राज़ी करने) के लिए करता हूँ किसी दिखावे के लिए नहीं।

ये शख्स पूरे मोहल्ले के तमाम कुत्तों या अन्य जानवरो को रोज दूध पिलाते हैं और इनका पूरी तरह ध्यान रखते है इस मोहल्ले के बहुत लोग ऐसा ही काम करते है। इन लोगों ने अलग से इन जानवरो के लिए बर्तन लिए हुए है और उनको जिसमे दूध पिलाते हैं।

आज के समय में जबकि पूरा देश लॉकडाउन है तो ये नेक काम और जानवरों का ध्यान रखना हम सबके लिए बहुत ज़रूरी काम है हम सबको अपने आस पास ऐसे ही सभी जानवरो का ध्यान रखना चाहिए जिससे कि उन बेजुबान को भी भूख से बचाया जा सके। उनको तो सिर्फ हमारी ही ज़रूरत होती है अपना पेट भरने के लिए। जानवर पूरी तरह इंसान पर निर्भर होता है और ये या ऐसा काम इंसानियत की पहचान होती है।

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