एसीएल: क्षतिग्रस्त घुटनों के इलाज में सहायक

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आमतौर पर घुटने से सटी मांसपेशियों में असंतुलन के कारण भी कभी-कभी दर्द होता है, जो कि घुटने के दर्द पर पूरी तरह से प्रभाव डालता है. एन्टीरियर क्रूसिएट लिगामेंट (एसीएल) एक प्रकार का लिगामेंट है, जो घुटने को स्थिर रखने में सहायक होता है. एसीएल क्षति खासकर एथलीट्स के बीच आम है, इसीलिए इसे स्पोर्ट्स इंजरी में शामिल किया जाता है. बास्केटबॉल, सौकर, फुटबाल, जिम आदि ऐसे खेल होते हैं, जिसमें घुटने की चोटें सबसे ज्यादा देखने को मिलती हैं. युवा जो ज्यादा खेलते हैं या जो मोटरसाइकिल तेज स्पीड में चलाते हैं, उनमें सबसे ज्यादा चोट लगने की या एक्सीडेंट होने की संभावनाएं होती हैं, जिसके कारण उनका एसीएल क्षतिग्रस्त हो जाता है. कई बार सीढियों से चढ़ते-उतरते वक्त या बाथरूम में पैर फिसलने से भी एसीएल क्षतिग्रस्त हो जाता है. एसीएल के क्षति हो जाने पर एन्टीरियर क्रूसिएट लिगामेंट पुनर्निर्माण सर्जरी की जरूरत पड़ती है. गाजियाबाद स्थित सेंटर फॉर नी एंड हिप केयर के वरिष्ठ प्रत्यारोपण सर्जन डॉ. अखिलेश यादव का कहना है कि आमतौर पर लोगों में डर बना हुआ है कि यदि उनके लिगामेंट क्षतिग्रस्त हो गए, तो उन्हें सर्जरी करानी पड़ेगी, जबकि असल में इसे कुछ केसेस में बिना सर्जरी के भी ठीक किया जा सकता है. हालांकि फिजिकल थेरेपी से एसीएल की क्षति को कुछ हद तक ठीक किया जा सकता है, लेकिन ऐसा उन लोगों में ही संभव है जो लोग कम सक्रिय होते हैं या कम खेल-कूद करते हैं. यह आपकी गतिविधि के लेवल पर निर्भर करता है कि आपको सर्जरी की जरूरत है या नहीं. 
डॉ. अखिलेश यादव का कहना है कि एसीएल के मामले में खून का प्रवाह कम हो जाता है जिससे उसके हील होने की संभावना कम होती है, इसलिए ज्यादातर मामलों में डॉक्टर सर्जरी की सलाह देते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार इस समस्या के बाद भी जो लोग बिना सर्जरी के इलाज करवाते हैं, उन्हें कुछ वक्त में आराम तो मिल जाता है, लेकिन सीढियां चढ़ते-उतरते वक्त या तेज गति से चलने के वक्त उन्हें घुटने में हलचल महसूस होती है और ऐसा महसूस होता है जैसे घुटना शरीर से बाहर आजाएगा. आमतौर पर आर्थराइटिस की समस्या 60-65 की उम्र के लोगों को होती है, लेकिन यदि एसीएल में क्षति आने के बाद भी सर्जरी न कराई जाए, तो ऐसे मामलों में 40-45 की उम्र में ही आर्थराइटिस की समस्या हो जाती है. लिगामेंट पुनर्निर्माण सर्जरी एक कारगर सर्जरी है, जिसमें मरीज को किसी तरह के दर्द का अनुभव नहीं होता है. सफल सर्जरी के लिए कीहोल सर्जरी (आर्थ्रोस्कोपिक) का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें मरीज को एक छोटा सा चीरा ही लगाकर काम हो जाता है. सर्जरी के बाद मरीज पुन अपना जीवन सामान्य तरीके से जी सकता है. इस सर्जरी के परिणाम बेहतरीन होते हैं, इसलिए मरीजों को इससे घबराने की जरूरत नहीं है. सर्जरी में बहुत कम समय लगता है और खर्चा भी कम होता है, इसलिए यह सर्जरी सुरक्षित होने के साथ-साथ लोकप्रिय भी है. सर्जरी के बाद मरीजों को बस एक बात का ख्याल रखना चाहिए कि वे नियमित रूप से एक्सरसाइज करें क्योंकि फिजियोथेरेपी मरीज को पूरी तरह से ठीक करने में एक अहम भूमिका निभाती है. 

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