दिल्ली की निचली अदालतों में सुरक्षा के पर्याप्त प्रबंध को लेकर हाई कोर्ट में याचिका

नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर निचली अदालतों में सुरक्षा के पर्याप्त प्रबंध करने के लिए दिशानिर्देश जारी करने की मांग की गई है। याचिका वकील दीपा जोसेफ ने दायर की है। रोहिणी कोर्ट में 24 सितंबर को फायरिंग की घटना के बाद इस याचिका में सुरक्षा इंतजाम और पुख्ता करने की जरूरी बताई गयी है। याचिकाकर्ता की ओर से वकील रोबिन राजू और ब्लेसान मैथ्यु ने रोहिणी कोर्ट में हुई फायरिंग पर चिंता जताई है। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली की निचली अदालतों में प्रैक्टिस करनेवाले वकील असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। घटना के दौरान एक महिला वकील घायल हो गईं। कोर्ट के अंदर शूटआउट ने जजों, वकीलों और पक्षकारों की सुरक्षा पर सवालिय़ा निशान खड़ा कर दिया है।

याचिका में कहा गया है कि दिल्ली की अदालतों में इसके पहले भी गोली चलने की घटनाएं हुई हैं। पिछले दिनों द्वारका कोर्ट में गोली चली थी। साल 2019 में साकेत कोर्ट के अंदर गोली चली थी और 2017 में रोहिणी कोर्ट में गोली मारकर एक विचाराधीन कैदी की कोर्ट परिसर में ही हत्या कर दी गई थी। साल 2015 में कड़कड़डूमा कोर्ट में चार हथियारबंद अपराधियों की गोलीबारी में एक हेड कांस्टेबल की मौत हो गई थी।

याचिका में कहा गया है कि रोहिणी कोर्ट में वकील के ड्रेस में जिस तरह अपराधी घुसे, उससे साफ है कि अपराधियों को पता था कि वकीलों के ड्रेस में कोर्ट में आसानी से प्रवेश मिल सकता है। ऐसे में दिल्ली पुलिस को दिशानिर्देश देने की जरूरत है कि वो कोर्ट परिसर में तैनात पुलिसकर्मियों को ये निर्देश दें कि हर वकील को उनका आई कार्ड देखकर ही प्रवेश करने की इजाजत दी जाए। इस दिशा निर्देश का पालन नहीं करनेवाले पुलिस अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई का आदेश दिया जाए।

याचिका में सुझाव दिया गया है कि दिल्ली बार काउंसिल सभी बार एसोसिएशन को एक एडवाइजरी जारी करे कि सभी वकील कोर्ट परिसर में प्रवेश करते समय पुलिस के साथ सहयोग करें। ज्ञातव्य है कि 24 सितंबर को रोहिणी कोर्ट रूम में फायरिंग में गैंगस्टर जितेंद्र गोगी की हत्या कर दी गई। रोहिणी के एडिशनल सेशंस जज गगनदीप सिंह की कोर्ट नंबर 207 में ये घटना हुई। जवाबी कार्रवाई में पुलिस की फायरिंग में दोनों हमलवार भी मारे गए।

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