परिवार नियोजन के लिए महिलाओं की पहली पसंद “आईयूसीडी” दूसरे नंबर पर महिलाओं ने अपनाया ‘अंतरा’

नोएडा। “अन्धविश्वास को तुम इस तरह से गले मत लगाओ, बच्चों को ईश्वर का उपहार बताकर जनसंख्या मत बढ़ाओ”, “कम बच्चे छोटा परिवार, यही है प्रगति का आधार”, “छोटा परिवार सुखी परिवार”। ऐसे स्लोगन दीवारों, पोस्टर और बैनर पर दिखते हैं। सरकार का भी प्रयास है कि लोग परिवार नियोजन अपनाएं, उसके लिए उन साधनों को अपनाएं जो परिवार नियोजन के लिए जरूरी हैं। धीरे-धीरे ही सही लोगों में परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता बढ़ी है। दम्पति परिवार नियोजन के लिए स्थाई व अस्थाई विभिन्न साधन अपना रहे हैं। अप्रैल वर्ष 2021 से सितम्बर 2021 तक सबसे ज्यादा आईयूसीडी (इंट्रायूटरिन काँट्रासेप्टिव डिवाइस), अपनायी गई। इस दौरान 2927 महिलाओं ने इसे अपनाया। दूसरे नंबर पर गर्भनिरोधक इंजेक्शन अंतरा की मांग रही। तीसरे विकल्प के रूप में महिलाओं ने पीपीआईयूसीडी को अपनाया है।
परिवार नियोजन कार्यक्रम के नोडल अधिकारी एवं एसीएमओ डा. भारत भूषण ने बताया- स्वास्थ्य विभाग का पूरा ध्यान परिवार नियोजन पर है। विभिन्न कार्यक्रमों और गतिविधियों के माध्यम से लोगों को परिवार नियोजन के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जाता है। इसी क्रम में हर माह की 21 तारीख को जनपद के सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर खुशहाल परिवार दिवस का आयोजन किया जाता है। इसमें परिवार नियोजन कार्यक्रम के बारे में विस्तार से जानकारी के साथ ही परिवार नियोजन के साधन निशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं। इसके अलावा समय-समय पर अन्य कार्यक्रमों के जरिए यह बताया जाता है कि परिवार नियोजन कार्यक्रम क्यों जरूरी है। उन्होंने बताया जनपद में परिवार नियोजन के लिए सबसे ज्यादा महिलाओं ने आईयूसीडी को पसंद किया है। दूसरे नंबर पर गर्भनिरोधक इंजेक्शन अंतरा रहा और तीसरे नंबर पर पीपीआईयूडी।
परिवार नियोजन विशेषज्ञ ने बताया-जनपद में अप्रैल वर्ष 2021 से सितम्बर 2021तक परिवार नियोजन के लिए गर्भनिरोधक साधन सामान्य आईयूसीडी को सबसे अधिक अपनाया गया। इस दौरान करीब 2927 महिलाओं ने इसे अपनाया। अंतरा अपनाने वाली महिलाओं की संख्या 1768 रही। इसी दौरान 1248 महिलाओं ने प्रसव के पश्चात आईयूसीडी पर भरोसा जताया। उन्होंने बताया- अप्रैल वर्ष 2021 से सितम्बर 2021 तक 230 महिलाओं की नसबंदी की गयी। प्रसव पश्चात 262 महिलाओं ने नसबंदी करायी जबकि गर्भपात के पश्चात यह संख्या 20 रही। इसी तरह 37 महिलाओं ने गर्भपात के बाद आईयूसीडी को अपनाया है। जनपद में 11 पुरुष परिवार नियोजन के लिए आगे आये, उन्होंने नसबंदी कराकर समाज को परिवार नियोजन का संदेश दिया।

क्या है आईयूसीडी :
प्रसव के 48 घंटे के अन्दर यानि अस्पताल से छुट्टी मिलने से पहले महिला आईयूसीडी लगवा सकती है। एक बार लगने के बाद इसका असर पांच से दस साल तक रहता है। बच्चों के जन्म के बीच अंतर रखने की यह लम्बी अवधि की विधि बहुत ही सुरक्षित और आसान भी है। यह गर्भाशय के भीतर लगने वाला छोटा उपकरण है जो कि दो प्रकार का होता है- पहला कॉपर आईयूसीडी 380 ए- जिसका असर दस वर्षों तक रहता है, दूसरा है- कॉपर आईयूसीडी 375 जिसका असर पांच वर्षों तक रहता है।
गर्भनिरोधक इंजेक्शन अंतरा
अंतरा एक गर्भनिरोधक इंजेक्शन है। इसका प्रजनन क्षमता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। हर बार अंतरा इंजेक्शन लगवाने के बाद 90 दिन (तीन माह) तक गर्भधारण से सुरक्षा हो जाती है तथा लाभार्थी की गोपनीयता एवं निजता भी बनी रहती है। अंतरा धात्री महिलाओं (प्रसव के 6 सप्ताह बाद) के लिए प्रभावी एवं सुरक्षित गर्भ निरोधक साधन है।

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