पांच साल में पहली बार प्रेस कांफ्रेंस और अमित शाह की आड़ में छिपे नज़र आये ‘मौन मोदी’, आखिर क्यों?

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अपने 5 साल के कार्यकाल के बचे चंद आखिरी दिनों में पीएम मोदी ने शुक्रवार को एक प्रेस कांफ्रेंस की और पार्टी के नई दिल्ली स्थित ‘पांच सितारा’ कार्यालय में भाजपा को कवर करने वाले रिपोर्टरों के बीच में पांच साल में पीएम मोदी पहली बार प्रेस कांफ्रेंस करने आए, लेकिन किसी सवाल के जवाब दिए बिना ही वापस लौट गए। पत्रकारों के सवालों को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी मौन रहे, और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की आड़ में छिपते नजर आए।

वहीँ अगर बात करें पिछले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को ‘मौन मोहन सिंह’ बुलाने वाले मोदी ने पत्रकारों के सवालों को लेकर उनसे बड़ा मौन ओढ़ लिया। आपको मालूम हो कि मोदी के उल्टा पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने कभी प्रेस वार्ताओं से कतराने की कोशिश नहीं की। उन्होंने हर साल कम से कम दो प्रेस वार्ताएं तो जरूर कीं थी।

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वैसे अपने कार्यकाल में हमारे मौजूदा पीएम नरेंद्र मोदी ने ढेर सारे इतिहास बनाए है। उनके सर्मथकों के बीच भी यह स्लोगन खूब चला था कि, इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है। तो शुक्रवार को भी पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने समर्थकों को निराश नहीं किया और पीएम नरेंद्र मोदी लोकतांत्रिक भारत के इतिहास में ऐसे प्रधानमंत्री के रूप में दर्ज हो जाएंगे, जिसने प्रेस कांफ्रेंस में किसी भी पत्रकार के एक भी सवाल का जवाब नहीं दिया है। 

हालांकि आपको बता दें, अपने इस पाँच साल के कार्यकाल के आखिरी क्षणों में प्रेस कांफ्रेंस करके उन्होंने यह मौका अपने समर्थकों को नहीं दिया कि, वे यह दावा कर सकते हैं कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इतिहास में एक भी प्रेस कांफ्रेंस न करने वाले पहले प्रधानमंत्री हैं। 

किसी भी प्रेस कांफ्रेंस में सवाल का जवाब देने की परंपरा एक लोकतंत्र के लिए कितनी मायने रखती है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि, प्रेस के कट्टर आलोचक रहे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नियमित रूप से पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हैं। 

फिलहाल शुक्रवार को हुई प्रेस कांफ्रेंस के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिर्फ अपने मन की बात की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछे गए सवाल को उन्होंने पार्टी अध्यक्ष पर डालते हुए कहा कि, वह अनुशासित कार्यकर्ता हैं।

जबकि मालूम हो प्रधानमंत्री अपने बोलने के लिए ही जाने जाते हैं। वे खूब बोलते हैं और इस चुनाव में भी उन्होंने कितनी रैलियों को संबोधित किया है, इसकी भी जानकारी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने ही दी। प्रधानमंत्री मोदी ने सिर्फ गर्व से इतना बताया कि, उनकी एक भी रैली कैंसिल नहीं हुई है। 

फिलहाल सच्चाई यही है कि, चुनावी रैलियों, रेडियो, यूट्यूब, ऐप और कार्यकर्ताओं के बीच खूब और लंबा बोलने वाले प्रधानमंत्री मीडिया के सामने आते ही चुप्पी ओढ़ लेते हैं और वह सिर्फ अपने कुछ पसंदीदा एंकरों को साक्षात्कार देते हुए नजर आते हैं। 

वहीँ शुक्रवार को प्रेस कांफ्रेंस ने उन्होंने दावा किया कि, पांच साल के कार्यकाल के बाद उनकी सरकार दोबारा चुनकर आएगी। तो वहीं अध्यक्ष अमित शाह ने आखिर में एक सवाल के जवाब में अफसोस भी जाहिर किया कि, पिछले पांच साल में हम मीडिया को साथ नहीं ले पाए, इसका मलाल है। 

हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किसी भी सवाल का जवाब नहीं देने पर विपक्षी दलों ने भी ख़ूब तंज कसा और आम चुनाव के प्रचार की समाप्ति पर कांग्रेस ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस की। 

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब पत्रकारों ने बताया कि भाजपा भी मीडिया से बात कर रही है तो, उन्होंने तंज करते हुए कहा कि, ‘वेरी गुड, प्रधानमंत्री का पहला प्रेस कॉन्फ्रेंस चुनाव परिणाम से चार पांच दिन पहले होता है। यह अजीब है कि, प्रधानमंत्री अमित शाह के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं। सुना है दरवाजा बंद कर दिया गया है और कुछ पत्रकारों को घुसने नहीं दिया जा रहा है और एक बंद कमरे में प्रेस कॉन्फ्रेंस हो रही है।’

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