मेरठ दस्तक अभियानः बुखार, आईएलआई, टीबी, कुपोषण, मौसमी बीमारियों पर रहेगा पूरा फोकस

  मेरठ। जिले में संचारी रोग नियंत्रण अभियान शुरू हो चुका है। ग्राम प्रधानों के सहयोग से गांवों में साफ-सफाई के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसी अभियान के अंतर्गत 12 से 25 जुलाई तक दस्तक अभियान चलाया जाएगा, जिसमें आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता फ्रंट लाइन वर्कर्स मुख्य जिम्मेदारी निभाएंगी। प्रशिक्षित फ्रंट लाइन वर्कर्स घर-घर भ्रमण कर विभिन्न रोगों के नियंत्रण एवं उपचार की जानकारी प्रदान करने के लिए प्रचार प्रसार एवं व्यवहार परिर्वतन गतिविधियां संचालित करेंगे। इसके साथ ही आशा-आंगनबाड़ी कार्यकर्ता इस अभियान के अंतर्गत कुपोषित बच्चों तथा विभिन्न रोगों के लक्षण युक्त व्यक्तियों का चिन्हीकरण कर सूचीबद्ध करेंगी। उन्हें मुख्य रूप से पांच बिन्दुओं-बुखार, इंफ्लुएंजा लाइक इलनेस (आईएलआई) ,टीबी, कुपोषण और दिव्यांगता पर फोकस करना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ व यूनिसेफ के कार्यकर्ता आशा-आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा दस्तक अभियान के तहत किए गए कार्यों को परखेंगे।
जिला मलेरिया अधिकारी सत्यप्रकाश सिंह ने बताया संचारी रोग नियंत्रण अभियान के तहत 12 से 25 जुलाई तक दस्तक अभियान चलेगा। जिले में 12 ब्लॉक में आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की ड्यूटी लगाई गई है, जो घर-घर जाकर लोगों को बीमारी के प्रति जागरूक करेंगी तथा मरीजों की लिस्ट तैयार कर विभाग को सौंपेंगी। इस दौरान कोविड से ठीक हुए मरीजों, एक हफ्ते से ज्यादा बुखार या खांसी रहने वाले लोगों तथा कुपोषित बच्चों पर फोकस रहेगा। अभियान के तहत मिलने वाले मरीजों को संबंधित चिकित्सक से उचित उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने बताया कुपोषित मिलने वाले बच्चों की सूची बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग को सौंपी जाएगी, जिनके माध्यम से बच्चों को पोषण पुनर्वास केन्द्र एनआऱसी में रेफर किया जाएगा, इसी तरह टीबी के मरीजों को क्षय रोग विभाग को मरीजों की सूची भेजी जाएगी।

गृह भ्रमण के दौरान आशा-आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पूछेंगी यह सवाल
1.क्या परिवार में किसी सदस्य को बुखार है।
2.परिवार में किसी सदस्य को दो सप्ताह से कम की खांसी-सांस लेने में भी परेशानी हो रही है।
3.परिवार में कोई ऐसा सदस्य तो नहीं है जिसको दो सप्ताह से अधिक समय से खांसी आ रही हो या वजन कम हो रहा हो या बलगम में खून आ रहा हो (संभावित क्षय रोगी)।
4.क्या परिवार में किसी बच्चे के स्वास्थ्य का स्तर सामान्य से कम है।

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