रोज़ा रखकर भाईचारे की मिसाल दे रहे दिल्ली की जेलों में बंद 100 से ज्यादा हिंदू कैदी

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रमजान मुबारक़ के महीने में दिल्ली की जेलों में बंद कैदियों ने हिंदू-मुस्लिम एकता और भाईचारे की शानदार मिसाल पेश की है और इन कैदियों ने समाज को आईना दिखाया है कि देश में कितना भी राजनीतिक पार्टियां धार्मिक माहौल बनाने की कोशिश कर रही है लेकिन हर धर्म का सम्मान करना चाहिए और सभी धर्म बराबर हैं!

दिल्ली की जेलों में बंद हिंदू कैदियों में 100 से ज्यादा कैदी ऐसे भी हैं जो जेलों में बंद मुस्लिम साथियों के साथ रोजा रख रहे हैं. ये सभी कैदी सुबह से शाम तक बिना कुछ खाए-पिए व्रत रख रहे हैं और शाम को मुस्लिम कैदियों के साथ रोजा इफ्तार कर रहे हैं, वहीँ तिहाड़ जेल प्रशासन ने बताया कि, दिल्ली की 16 केंद्रीय जेलों में बंद 16,665 कैदियों में 2,658 कैदी रोजा रख रहे हैं. रोजा रखने वाले इन कैदियों में 110 हिंदू भी हैं!

तिहाड़ जेल प्रशासन के अनुसार, रोजा रखने वाले हिंदुओं में 31 महिलाएं और 12 युवतियां हैं और जेल प्रशासन ने रोजा को ध्यान में रखते हुए रोज होने वाले लंगर के समय में बदलाव भी कर दिया है, ताकि सहरी, इफ्तार और नमाज के लिए राेजेदारों को समय मिल सके. वहीँ कैंटीन में रुह आफजा, खजूर और ताजा फलों की उपलब्धता भी बढ़ा दी गई है. साथ ही कैदी इन्हें कैंटीन से खरीदकर एक-दूसरे के साथ बांट कर खा रहे हैं और सभी केंद्रीय जेलों में रोजा इफ्तार की समुचित व्यवस्था की गई है.

जेल प्रशासन ने धार्मिक व समाजसेवी संगठनों को नमाज और रोजा इफ्तार के लिए कैदियों से मिलने की अनुमति भी दे दी है. इसके मद्देनजर सुरक्षा का खास बंदोबस्त भी किया गया है और दिल्ली में तिहाड़, रोहिणी और मंडोली जेल हैं जहाँ रोजा के दौरान पौ फटने से पहले किया जाने नाश्ता सहरी कहलाता है. इससे रोजेदारों को पूरे दिन भूखे-प्यासे रहकर व्रत रखने में सहूलियत होती है. वहीँ सहरी में ज्यादातर कैदी रोटी, सब्जी, फल, दही, चाय ले रहे हैं.

दिल्ली की जेलों में 1400 साल पुरानी परंपरा काे निभा रहे हैं कैदी 

वहीं, सूर्यास्त के समय रोजा इफ्तार की व्यवस्था होती है और इफ्तारी से पहले नमाज अदा की जाती है और मुस्लिम समुदाय के लोग 1400 साल से चले आ रहे पारंपरिक तरीके से इफ्तार करते हैं. इस दौरान वे सबसे पहले खजूर और पानी पीते हैं और इसके बाद खाना खाते हैं.

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