लखनऊ नदवा कॉलेज के अध्यापक ने पेश की हिन्दू मुस्लिम एकता की मिशाल,राम मंदिर मुद्दे पर कही बड़ी बात!

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मुज़फ्फरनगर

लखनऊ नदवा कॉलेज के अध्यापक ने पेश की हिन्दू मुस्लिम एकता की मिशाल,राम मंदिर मुद्दे पर कही बड़ी बात,हम राम मंदिर से अलग हटकर बना लेंगे मस्जिद,आपस मे मिलकर हल करे इस मुद्दे को जो पिछले 25 सालों से पड़ा हुआ है यह राम मंदिर का

शहर कोतवाली क्षेत्र के अम्बा विहार स्तिथ वासिक मिया मंसूरपुर वालो के यहां लखनऊ स्तिथ नदवा कॉलेज के अध्यापक व मुज़फ्फरनगर शहर से जुड़े मौलाना सलमान नदवी पहुँचे, इस दौरान वहां काफी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग भी मौजूद रहे जिन्होंने उनकी बातों को बड़ी गौर से सुना।इस दौरान मौलाना नदवी ने बताया कि मुज़फ्फरनगर से मेरा पुराना रिश्ता है हमारे जो पुरखे थे सैय्यद अब्दुल मुज़फ्फर उन्ही के नाम पर ही मुज़फ्फरनगर का नाम रखा गया,एक जमाना था कि की वे शाहजहाँ की हुकूमत में चीफ कमांडर थे,ओर उनके बेटे का नाम मंसूर था जिस पर मंसूरपुर रखा गया।में जब भी मुज़फ्फरनगर आता हूं तो यहां सब जगह हमारे खानदान के लोग है जहां में जाता हूं।मेरा मिशन जुड़ा हुआ है मानवता से जिसे में 30 सालों से चला रहा हु,मुल्क में ऐसी बहुत से ताकते है जो मुल्क को तोड़ना चाहती है,जो आपस मे बाटना चाहती है,जो जंगल के दरिंदो का किरदार अदा करती है।ऐसी ताकतों हम मुकाबला करते है इंसानियत से मानवता से,हम ह्यूमैनिटी वेलफ़ेयर बोर्ड के माध्यम से लोगो को समझाना चाहते है कि हम सब इंसान है ओर इंसान व्व होता है जिसके अंदर मोहब्बत होती है।वो ताकते जो मोब लीचिंग कराती है,हिन्दू मुस्लिम कराती है,मीडिया में बैठे कुछ लोग ऐसे है जो हर वक्त बैठे नफरत का प्रोग्राम देते है,ये ताकते ही ये सब कार्य कराती है।ओर साथ ही बताया जी बाबरी मस्जिद व राम मंदिर के मुद्दे को हमने खत्म किया,हमने कहा था कि अयोध्या से मस्जिद को हटा दो और झगड़े खत्म करो,अब कुछ लोग ऐसे है जो चाहते है कि तनाव बरकरार रहे और यह मुद्दा खत्म ही न हो।मैंने पर्सनल लॉ बोर्ड में यह मुद्दा उठाया था और रवि शंकर से बात कर रहा था कि इस मसले को हल करे,आपस मे हमारा भाई चारा कायम रहे,ओर सुप्रीम कोर्ट में जाने से बेहतर है इस मुद्दे को हल करे जो पिछले 25 सालों से चला आ रहा है,ओर जिसकी बुनियाद पर हजारो इंसान शहीद कर दिए गए हो।हमारा यही कहना है कि हम अलग हटकर अलग मस्जिद बना लेंगे,ओर मुल्क के अंदर जितनी भी मस्जिदे या दरगाह है या मदरसे है उन पर कोई भी आंच नही आई चाहिए।ओर इस बारे में हम सुप्रीम कोर्ट से जमानत लेंगे।जब हमने ये आवाज उठाई,तो हमारे कुछ कट्टर पंथी लोगो ने कहा कि नही साहब हम बात नही करेंगे,तो मैने कहा कि कोर्ट में फैसले होते रहते है लोगो के सिर फुटरमे रहते है,सीने ट्यूटर रहते है, हमे ऐसे फैसले नही चाहिए जिसमें लोग टूट जाए और अलग अलग हो जाए।हमे वो फैसला चाहिए जो आपस मे मिलजुलकर किया जाए जिससे आपस मे मोहब्बत की गंगा व जमना बहे।

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