लॉकडाउन में घर बैठे ऑनलाइन प्रतियोगिता के माध्यम से दिखाए अपनी प्रतिभा

मुज़फ्फरनगर: वर्तमान समय में कोरोना वायरस के चलते सम्पूर्ण देश में लॉकडाउन जारी है। ऐसे में सभी शैक्षणिक संस्थानों में भी कार्य ठहरा हुआ है। इस मुश्किल वक्त में प्रतिभाओं को मौका देने के लिए हमेशा अग्रसर रहने वाले श्री राम ग्रुप ऑफ कॉलेज के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभागपुरातन छात्र परिषद के संयुक्त तत्वावधान में लेखन कला को बढ़ावा देने के प्रयासों के तहत “राष्ट्रीय लेखन उत्सव” का आयोजन किया जा रहा है जिसमें विभिन्न विधाओं जैसे कविताएं, कहानी, संवाद लेखन, व्यक्ति विशेष लेखन व्यंग लेखन पर लेख मंगवाए जा रहे हैं।

यह आयोजन अपने आप मे विशेष भूमिका रखता है क्योंकि यह केवल एक लेखन उत्सव नहीं बल्कि कला का ऐसा संगम है जिसमें प्रतिभाग कर प्रतिभागी राष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकते हैं। इस आयोजन को और भी खास बनाते हैं इसके निर्णायक, लेखन उत्सव में निर्णायक की भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं शिक्षाविद व वरिष्ठ साहित्यकार, डॉ अरुण भगत। डॉ भगत लगभग 25 वर्षों से पत्रकारिता, साहित्य व एकेडमिक के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। आपातकाल पर डॉ भगत का शोध कार्य सराहनीय है। आप दर्जनों से ज्यादा पुस्तकें लिख चुके हैं। लंबे समय से पत्रकारिता कर रहे हरीश चंद्र बर्णवाल, जी न्यूज, 18, डीडी न्यूज़, स्टार न्यूज़ आदि संस्थानों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं इसके अलावा हरीश जी को लेखन कला के क्षेत्र में महारथ हासिल है। हरीश जी प्रधानमंत्री मोदी पर आधारित कई पुस्तके लिख चुके है जिन्हें जबरदस्त सराहना मिल रही है।

इसके अलावा निर्णायक मंडल में 20 वर्षों से पत्रकारिता कर रहे पीयूष पांडेय, जो टीवी की दुनिया का एक बड़ा नाम है। पीयूष आजतक, जी न्यूज, एबीपी न्यूज़ आदि संस्थानों में कार्य कर चुके है वही वरिष्ठ व्यंगकार भी है। व्यंग पर आधारित आपकी कई पुस्तकें पाठकों के बीच बेहद लोकप्रिय है। वरिष्ठ पत्रकार व लेखक डॉ राकेश योगी लंबे समय से पत्रकारिता में सक्रिय है, आप एक कुशल लेखक भी हैं। राकेश जी के द्वारा कई पुस्तकों का लेखन भी किया जा चुका है।

राकेश जी पत्रकारिता के क्षेत्र में एक बेजोड़ नाम हैं, साथ ही आप सामाजिक सरोकार के विषयों पर भी लगातार कार्य करते रहते हैं. हमारे आयोजन में चार चांद लगा रही है राष्ट्रीय स्तर की कवयित्री श्रीमती अंकिता सिंह, अंकिता सिंह देश की प्रथम श्रेणी की कवयित्रियों में शुमार हैं। भारत ही नहीं अपितु दुनिया भर में आपके कौशल का डंका बजता है, हमारा आयोजन हमारे निर्णायकों के कारण बेहद खास है। राष्ट्रीय लेखन उत्सव में कोई भी छात्र छात्रा एवं कोई अन्य व्यक्ति बिना किसी बाध्यता के इस प्रतियोगिता में प्रतिभाग कर सकते हैं आप अपनी कृतियाँ हमे [email protected] पर पूरे नाम और पते के साथ भेजें। इसके अलावा किसी भी प्रकार की समस्या होने पर सम्पर्क सूत्र 7011962075 पर भी सम्पर्क किया का सकता है। कृतियां भेजने की अंतिम तिथि 14 मई रखी गयी है।

सभी प्रतिभागियों में से बेहतर करने वाले कुछ विजेताओं को चुना जाएगा जिसके बाद प्रत्येक विधा में पृथक रूप से प्रथम, द्वितीय व तृतीय आने वाले प्रतिभागी को पुरुस्कृत किया जाएगा। राष्ट्रीय लेखन उत्सव में प्रतिभाग करने वाले प्रत्येक प्रतिभागी को प्रशस्त्री पत्र भी दिए जाएंगे। श्रीराम ग्रुप ऑफ कॉलेज के पत्रकारिता एवं संचार विभागाध्यक्ष रवि गौतम ने बताया कि ये आयोजन यकीनन प्रतिभाओं को नई उड़ान देने का काम करेगा। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के बीच ऐसे वक्त जब अधिकतर लोग अपने घरों में बैठे हैं तो ऐसे में अपनी प्रतिभा को पहचानकर उसे निखारने का ये बेहतरीन मौका है। इसमें बढ़ चढ़कर नई उम्र के युवाओं को प्रतिभाग करना चाहिए क्योंकि इससे ना सिर्फ उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा अपितु अपने अंदर छिपे टैलेंट से भी वो दुनिया को रुबरू करा सकते हैं।

दिल्ली में पत्रकार एवं श्री राम ग्रुप ऑफ कॉलेज के पुरातन छात्र परिषद के मीडिया प्रभारी अक्षय शर्मा ने ज़्यादा से ज़्यादा लोगों से इस प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने की अपील करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से लोगों की प्रतिभाओं को बाहर लाने में मदद मिलेगी उन्होंने बताया कि हमने कार्यक्रम पूर्ण रूप से एक स्वतंत्र प्रारूप में ढाला है, हमने किसी भी प्रकार की कोई बाध्यता नही रखी है। राष्ट्रीय लेखन उत्सव उन सबके लिये एक मंच है जो लेखन कला में सक्रिय है या अपनी कला को प्रदर्शित करने के लिये मंच ढूंढ रहे हैं, हमारा उद्देश्य केवल इस उत्सव तक ही सीमित नही है, हम प्रयास करेंगे कि यह कड़ी अब लंबी हो और सतत संवाद के जरिये हम इस तरह के आयोजन करते रहें।

इस उत्सव के आयोजन मंडल में पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर वैशाली रस्तोगी, महाविद्यालय के पूर्व छात्र रविश अहमद, ललित कुमार, बिलाल, सलीम, नितिन चौधरी, विकास कुमार हरीश सहरावत, आदि सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।

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