सरकार उधार कैश के लेन-देन पर लगा चुकी हैं पाबंदी! अभी जान लो उधार कैश से जुड़े सभी कानून, बाद में न हो समस्या!

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अनरेग्युलेटेड डिपॉजिट स्कीम्स 2019 (unregulated deposit schemes ordinance 2019) पर सरकार ने अध्यादेश लाकर कानून बना चुकी है कि उधार के लिए कैश का लेन-देन गैरकानूनी माना जायेगा. आपको बता दें शारदा स्‍कैम, ईमू फॉर्मिंग से लेकर क्रिप्‍टोकरंसी तक की पोंजी स्‍कीम में अपनी गाढ़ी कमाई गवां चुके जैसे निवेशकों के हितों की रक्षा करने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है.

एक्सपर्ट्स की माने तो बताते हैं कि इस कानून के तहत सभी तरह के अनरेग्युलेटेड डिपॉजिट स्कीम पर रोक लग गई है और छोटे टैक्सपेयर्स को ध्यान में रखकर ये फैसला लिया गया है लेकिन साथ ही इस कानून में साफ कहा गया है कि अगर आप रिश्तेदार से नकद में लेन-देन करते हैं तो ये गैरकानूनी नहीं है. बता दें कि इस कानून के तहत 1-7 साल तक की सजा का प्रावधान है और वहीं, 1 लाख से करोड़ों रुपये का जुर्माना भी भरना पड़ सकता है.

डिपॉजिट लेने वालों को लेकर साफ तौर पर समझाया गया है
इस कानून में यह बताया गया है कि किस तरह के डिपॉजिट्स पर प्रतिबंध है और किस तरह के डिपॉजिट्स रेग्युलेटेड हैं या सरकार की ओर से नोटिफाइड हैं और इस तरह फाइनेंशियल सिस्टम में लिए जाने वाले कई तरह के डिपॉजिट्स के रेग्युलेशन के लिए एक लीगल स्ट्रक्चर बना है जिसे हम आपको बता रहे है

(1) इस कानून के दायरे से कारोबारी और वाणिज्यिक उद्देश्य से जुड़े हर तरह के डिपॉजिट्स या लोन को बाहर रखा गया है, जो अभी आरबीआई और सेबी के कई नियमों के तहत रेग्युलेट किए जाते हैं और कानून में ‘डिपॉजिट लेने वाले’ की विस्तृत व्याख्या दी गई है और इसमें कहा गया है कि इस परिभाषा के तहत रखे गए व्यक्तियों पर अनरेग्युलेटेड डिपॉजिट लेने से पूरा प्रतिबंध है.

(2) अनरेग्युलेटेड डिपॉजिट स्कीम ऑर्डिनेंस अवैध तरीके से डिपॉजिट लेने की गतिविधियों पर रोक लगाएगा और शिकायत से निपटने की व्यवस्था कर यह जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा करेगा और रेग्युलेटरों के बीच पैदा होने वाले टकराव से पार पाने के लिए इस अध्यादेश ने डिपॉजिट लेने की हर तरह की गतिविधियों को अपने दायरे में ले लिया है.

(3) इस कानून के पालन पर नजर रखने के लिए सरकार ने एक अथॉरिटी बनाने की बात की है, जिसे काफी अधिकार दिए गए हैं और साथ ही इस अथॉरिटी के पास कानून का उल्लंघन करने वालों के परिसरों की जांच करने, उसे रिकॉर्ड्स पेश करने के लिए मजबूर करने और संबंधित व्यक्ति की प्रॉपर्टी जब्त करने का सिविल कोर्ट सरीखा अधिकार भी है.

(4) इस तरह के फ्रॉड के मामलों में एक बड़ी कमजोरी भी इस अध्यादेश से दूर की गई है जैसे संज्ञेय और गैर-जमानती अपराधों में मुकदमा चलाने के लिए एक विशेष अदालत बनाई जाएगी और यही नहीं, अदालतें संपत्ति जब्त करने, उनकी कुर्की और उससे हासिल रकम को जमाकर्ताओं के बीच वितरित कराने की कानूनी प्रक्रिया भी पूरी करेंगी और यह प्रक्रिया सक्षम अथॉरिटी की ओर से आवेदन दिए जाने के 180 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी.

क्लियर टैक्स की चीफ एडिटर प्रिति खुराना एक न्यूज़ चैनल के माध्यम से बताती हैं कि बैनिंग ऑफ अनरेग्युलेटेड डिपॉजिट स्कीम ऑर्डिनेंस से आरबीआई और सिक्यॉरिटीज ऐंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया के कई रेग्युलेशंस और तमाम प्रशासनिक इकाइयों के कई अन्य नियमों की कमियां दूर करने की कोशिश की गई है और यह अनरेग्युलेटेड डिपॉजिट स्कीम्स के जरिए लिए जाने वाले डिपॉजिट पर रोक लगाने के लिए लाया गया है.

यह कानून हर अनरेग्युलेटेड डिपॉजिट स्कीम पर ऐक्शन लेने का अधिकार राज्य सरकार को देता है और इसने एक तरह से ऐसी गतिविधियों पर नजर रखने की जिम्मेदारी से आरबीआई या सेबी को मुक्त कर दिया है.

कई अन्य देशों की तरह भारत में भी कई रेग्युलेटर वित्तीय क्षेत्र की तमाम गतिविधियों पर नजर रखते हैं और उनके लिए दिशानिर्देश देते हैं. आपको बता दें भारत में कम से कम नौ रेग्युलेटर या प्रशासनिक इकाइयां डिपॉजिट लेने की गतिविधियों को रेग्युलेट करते हैं और इनमें आरबीआई, सेबी, आईआरडीएआई और राज्यों के कुछ विभाग भी शामिल हैं. कई फ्रॉड का मामला इन रेग्युलेटरी खाइयों के बीच चला जाता है.

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