न प्रदेश हुआ गढ्ढा मुक्त, न मिला रोज़गार!, हर तरफ बस मची रही हाहाकार!, करोड़ो, अरबो लेकर माल्या, मोदी, फरार!, अफसोस कल तक था जो चाय वाला, अब बन गया चौकीदार! पूरा पढ़े!

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शहर में सड़कों का हाल बेहाल है। चुनावी वक्त में वायदे तो बेशुमार किये जाते है, मगर उन पर अमल होता नही दिखता, कहने का मतलब साफ है, उत्तर प्रदेश में सत्ता में आते ही भाजपा सरकार ने गढ्ढा मुक्त प्रदेश बनाने का संकल्प लिया था, मगर सालों साल बीत जाने के बाद भी ये संकल्प पूरा होता नही दिखा, बल्कि हालात ये है कि सड़कों की दुर्दशा पहले के मुकाबले ज्यादा जर्जर पड़ी है। ये बात समझ से परे है, कि जगह जगह टोल टैक्स वसूले जाने के बावजूद भी सड़को में सुधार नज़र नही आता। आखिर जनता से वसूला जा रहा टेक्स जाता कहा है, ये एक सवाल बनकर उभर रहा है। सरकार कोई भी हो, कोई ज्यादा तो कोई कम लेकिन हर सरकारों में सिर्फ विकास मेन्युफेस्टू तक सीमित रह जाता है, जमीन पर नज़र नही आता, कसूरवार सरकारों को ही क्यो ठहराया जाए जबकि देश की जनता भी इन मुद्दों को नज़रंदाज़ कर हिन्दू, मुस्लिम, मंदिर मस्जिद में उलझकर रह जाती है। फिर चुनाव आता है तो एक दूसरी पार्टियां कॉम्पिटिशन कर अपने द्वारा कराए गए कामो को एक दूसरो से बेहतर बताती है।

संसद या विधानसभा में करोड़ो, अरबो की योजनाओ पर मुहर लगती दिखती है मगर उन योजनाओं का लाभ जमीन पर पहुंचने तक लाखो में रह जाता है क्योंकि जनता के लिये योजनाएं तो भलीभांति चलाई जाती है मग़र उन योजनाओं का लाभ अधिकारी व कर्मचारी उठाते है। भ्र्ष्टाचार इस कद्र बढ़ रहा है कि एक पासपोर्ट की पूछताछ के लिए आने वाला व्यक्ति उसका कैरेक्टर नही बल्कि जेब देखकर उसकी जांच करता है, और कमाल की बात ये है कि इसे लोग रिश्वत नही फीस कहते है। सरकारी पदों पर बैठे बहुत लोगो को लाखो की सेलरी भी कम दिखाई देती है, और बहुत बेरोज़गार सिर्फ पेट भरने के लिए दरबदर नौकरी मांगते फिरते है। इन मुद्दों पर ध्यान देने की आवश्यकता है, मगर जुमलों पर ध्यान दिया जा रहा है।

मदीना चौक से रुड़की रोड़ पर जाने वाली सड़क

हमारे देश के लोगो को वोट के लिए झूठे वायदे करने वाले नेताओं की पोल जगह जगह गढ्ढे और मुज़फ्फरनगर के मदीना चौक से रुड़की चुंगी जाने वाले रोड़ को देखकर ही खुल जाती है। मदीना कालोनी व जनकपुरी के बीच रुड़की चुंगी से लेकर सितारा पब्लिक स्कूल तक रोड का हाल बेहाल है। क्षेत्रीय लोग ही नहीं राहगीरों का भी बुरा हाल है। गाड़िया निकलती है तो आधी पानी के भीतर चली जाती है। लोगो का जीना दूभर है। यहां कई बार अनहोनी होने से बची। बरसात में यहां पानी नदी की तरह बहता है। अलीना हॉस्पिटल के पास में खड़े ट्रांसफार्मर के ऊपर तक पानी चढ़ता जाता है। पानी मे करंट आने का खतरा भी मंडराता है, ये जब है तब इस इलाके का महत्वपूर्ण रास्ता यही है, मगर नेता या अधिकारियों का इस तरफ कोई ध्यान नही, जो सवाल पैदा करता है कि आखिर नेता व अधिकारी इससे अनजान क्यो बने हुए है? क्षेत्र के लोगो ने इसके लिए कई बार नेताओ व अधिकारियों से मांग की मगर कोई समाधान नही निकल सका। पिछले दिनों लखनऊ के बड़े अधिकारी के आने की सूचना पर वहाँ पानी को ढांपने के लिए खड़ंजा बिछवाया गया मगर चार दिन बाद उसका भी पता नही चला। यही हाल जगह जगह देखा जा सकता है।

रुड़की रोड़, रुड़की चुंगी, निकट विश्वास धर्म कांटा

इसके अलावा मुज़फ्फरनगर में ही रुड़की रोड पर विश्वास धर्म कांटे के सामने जीटी रोड पर बड़ा गहरा गढ्ढा होने के कारण कई बार बड़े हादसे होने से टले मगर नेताओ या अधिकारियों की उधर नज़र नही पड़ी। जब शिकायत के बावजूद भी कोई समाधान नही निकला तो वहां के लोगो ने आने जाने वाले मुसाफिरों की सुरक्षा के लिए स्वयं ही उस गढ्ढे को भरने का निर्णय लिया। मोहम्मद इंतज़ार, साजिद, इरफान आदि लोगो ने स्वयं उस गढ्ढे को रहड़े में ईंटे लाकर भरा, ये इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि फिलहाल चुनावी दौर है, इस दौर में जनता के कदमो में वो नेता भी दिखते है जिनसे मिलने के लिए लोग तरसते है, ऐसे दौर में भी लोगो का ये काम नेताओ पर लानत भेजता है।

फरमान अब्बासी पत्रकार एवं लेखक

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