भीड़ ने फिर किया निहत्ते पर वार, पुलिस कर रही समझौते का इंतज़ार – लेखक फरमान अब्बासी

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भीड़ द्वारा मासूमो की पिटाई के मामले अक्सर आते रहते है। मैं नाम पूछकर पिटाई करने वालो के खिलाफ बहुत बार लिख चुका, मग़र अदनान की पिटाई के बाद दूसरी बार आज फिर मुज़फ्फरनगर के मंसूरपुर क्षेत्र में नाम पूछकर की गई बुझदिलो की फौज द्वारा जाकिर अली के साथ मारपीट के बारे में लिख रहा हूँ। आलम यह है कि ये भीड़ का रूप धारण करने वाले कथित गुंडे किसी भी संगठन या पार्टी का चौला ओढ़े रखते है, वैसे तो कभी सामने आकर वार नही करते दिखते मगर कभी इत्तेफाक से इनकी पहचान हो जाती है तो ये अपने कथित संगठन या पार्टी का सहारा लेकर बच निकलते है। खेर बुझदिलो की फौज के बारे में विस्तार से बताने की आवश्यकता तो नही क्योकि इन पांच सालों में ये भीड़ उर्फ बुझदिलो की फौज काफी मशहूर हो चुकी है। बस इनका भेष तो बदल जाता है, मगर काम यही रहता है। कभी गौरक्षक बनकर तो कभी धार्मिक बनकर तो कभी भीड़ बनकर समय समय पर ये देशवासियो पर हमले कर खुद को राष्ट्रभक्त बताते फिरते है, उन्हें किसी का खौफ नही होता। वो जान लेने से भी पीछे नही हटते, क्योकि दादरी हो या अलवर या फिर जुनैद की हत्या, इन सबके पीछे भी बुझदिलो की फौज का हाथ है। दरअसल इनमें खौफ होगा भी क्यो? जब सत्ताधारी पार्टी का समर्थन इन्हें प्राप्त हो। आज विकास के नाम पर नही, जाति, मज़हब के नाम पर राजनीति होती है। देश अंग्रेजो से तो आज़ाद हो चुका मगर फूट डालो, राज़ करो उनकी इस नीति से अभी तक भी आज़ाद नही हुआ, जबकि देश को आजादी पूरी तरह तभी मिलेगी जब देश इस नीति से आज़ाद हो चुका होगा। जाकिर अली रास्ते से गुज़र रहे थे, मंसूरपुर क्षेत्र में कुछ लोग ट्रक चालक के साथ मारपीट कर रहे थे, उन्होंने उन लोगो से ट्रक ड्राइवर के साथ मारपीट न कर पुलिस को सौंपने की बात कही। इस पर भीड़ ने उनका नाम पूछकर उन्ही के साथ बेरहमी से मारपीट शुरु कर दी। घायल युवक एक न्यूज़ चैनल में पत्रकार भी है। घायल पत्रकार का जिला अस्पताल में उपचार चल रहा है। हैरानी की बात ये है कि पुलिस कुछ कार्यवाही करने के बजाय समझौते का इंतज़ार कर रही है।

फरमान अब्बासी पत्रकार एवं लेखक🖊🖊

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