मोदी जी ये कैसा सम्मान दिला दिया, योगी ने मुस्लिम महिला को आतंकी की बेटी बता दिया

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सोच रहा था कि एक महाशय के बयान पर कुछ लिखू मगर सोचा कि भैस के आगे बीन बजाना लोहे के चने चबाना जैसा होता है। किसी की आलोचना करना गलत नही होता मगर गलत अल्फ़ाज़ इस्तेमाल करना गलत होता है। आम व्यक्ति कुछ गलत बोल दे तो ज्यादा अफसोस नही होता मगर एक जिम्मेदारी के पद पर बैठा व्यक्ति गलत बोले तो बहुत अफसोस होता है। जी हां मैं बात कर रहा हूँ यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की, जिन्होंने सहारनपुर में किसी नेता को अजहर मसूद आतंकी का दामाद बता दिया, और हैरानी की बात ये है कि इमरान मसूद को आतंकी का दामाद सिर्फ सरनेम के आधार पर बताया गया जबकि सच्चाई तो ये है कि मुख्यमंत्री को इमरान मसूद के ससुर के बारे में शायद जानकारी भी न हो।

आज तक मुस्लिम नाम के व्यक्ति के आतंकी होने पर सभी आतंकियों को सिर्फ मुसलमान बना दिया जाता था, मगर अब नाम या सरनेम एक जैसे होने पर भी आतंकियों का रिश्तेदार बनाने का प्रयास किया जा रहा है। किसी को बेवजह इतना बड़ा इल्ज़ाम देने वाले व्यक्ति के सीएम होने पर भी अफसोस होता है। ये पहली बार नही बार बार इस तरह के बेफालतू बयान सुने जाते रहे है। पिछली मर्तबा अचानक मुख्यमंत्री को न जाने क्या हुआ, कहने लगे मैं हिन्दू हूँ, ईद नही मनाता। योगी जी अगर इमरान के आगे मसूद होने पर वो अज़हर मसूद के दामाद है तो फिर प्रधानमंत्री के नाम नरेंद्र के आगे मोदी होने पर उन्हें किसका रिश्तेदार कहा जाना चाहिएं। नीरव मोदी या ललित मोदी का रिश्तेदार कहू। बीजेपी नेता कुछ दिनों से तीन तलाक के नाम पर मुस्लिम महिलाओं के सम्मान की चिंता में व्यस्त थे, लेकिन किसी की बीवी को आतंकी की बेटी कह देने से पहले तुम्हे किसी मुस्लिम महिला के सम्मान की परवाह नही हुई। परवाह होगी कैसे, सिर्फ वोट बटोरने के लिए ही तो ये तिकड़मबाजी का खेल खेला जाता है। देश को हिन्दू मुस्लिम में बांटकर, असल मुद्दों से भटकाकर, एक विशेष समुदाय का खुद को हिमायती जताकर, लोगो को फसाद और आपसी झगड़ो में उलझाकर सिर्फ सत्ता पाने की जुस्तजू में लगे रहते है। देश की आर्थिक हालात इन दिनों ऐसी है कि हिन्दू और मुस्लिमो के बीच गहरी खाई खोदकर दोनो को आपस में मिलने से रोकने के लिए उस खाई में गिरने का डर उनके दिलों में भरा जा रहा है, देश की तानाशाही सरकार कामयाब इसलिए भी है क्योंकि देश की मीडिया उनकी कठपुतली बनकर उन्ही के इशारे पर चल रही है। डिबेट उस मुद्दे पर नही होती, जिसकी देश को जरूरत है, उस मुद्दे पर की जाती है जिससे बीजेपी को फायदा हो। देश की जनता की भावनाओ के साथ खेल रही है मीडिया।

फरमान अब्बासी पत्रकार एवं लेखक

1 COMMENT

  1. नमस्ते मैं शरद कुमार शर्मा एक सोसल वर्कर सिर्फ इतना जानता और साथ मे मानता भी हूं कि काठी की हांडी बार बार नही चढ़ती है चाहे मीडिया साथ दे या कोई अन्य लेकिन हर रात के बाद जैसे दिन सुनिचित है ठीक उसी प्रकार यहाँ भी होता है।
    कितनी बार लोगो को बेबकुफ़ बनाया जाएगा एक न एक दिन सच्चाई सबके सामने आएगी और इन बंटबारे की राजनीति करने बालो को बिलुप्त होना ही पड़ेगा।
    सुक्रिया मेरे सम्मानित मित्रो

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