Cheque bounce: चेक बाउंस हुआ तो और बढ़ सकती हैं मुश्किलें, अभी जान ले आरबीआई- RBI ने किया बड़ा बदलाव,

87

Case less – कैशलेस और डिजिटल लेनदेन से चेक से होने वाले भुगतान में तो कमी आई है लेकिन अभी इन सबके बीच चेक बाउंस के मामलों में कमी देखने को नहीं मिली है तो आपको बता दें चेक बाउंस के अपराध में सजा के प्रावधान को और कड़ा किया गया है और इसमें खाता बंद करने के साथ ही चेक बुक को नहीं जारी करना भी शामिल है।

बार-बार चेक बाउंस होने पर यह है नया नियम
आरबीआई RBI ने बैंकों से उन ग्राहकों से सख्ती से पेश आने को कहा है, जिनके चेक लगातार बाउंस होते रहते हैं क्योंकि अब ऐसे ग्राहकों को बैंक नई चेक बुक जारी नहीं करेगा और वहीं चालू खाताधारकों का खाता भी बंद कर दिया जाएगा और आरबीआई RBI ने बैंकों से कहा है कि, एक वित्तीय वर्ष में चार बार चेक बाउंस होने पर ऐसा प्रावधान किया जाए।

चेक तीन महीने के लिए होता है वैध
जैसा के सभी जानते है चेक जारी होने के बाद तीन महीने तक के लिए वैध होता है और अगर तीन महीने से ज्यादा पुराना चेक बैंक के पास जाता है तो फिर उसका भुगतान नहीं होगा।

लोक अदालत में निबटेगा चेक से जुड़ा मुकदमा
चेक बाउंस का मुकदमा लोक अदालत में लाने के लिए सरकार कानून में बदलाव करने की सोच रही है हालांकि आपको बता दें इसका फैसला अब 23 मई के बाद लिया जाएगा, जब नई सरकार सत्ता में आएगी और इसके साथ ही मुकदमें का खर्चा भी डिफॉल्टर के ऊपर लगाया जाएगा।

अभी चेक बाउंस पर देना पड़ता है भारी जुर्माना
जिस गलती का जिक्र हम कर रहे हैं वो है चेक का बाउंस होना और इस गलती पर बैंक करीब 800 रुपये तक की राशि आपके खाते से काट लेते हैं आपको बता दें दो तरीको से चेक बाउंस होता है जिसमें पहला खाते में राशि का कम होना और दूसरा, किसी तरह की तकनीकी गलती का होना जैसे हस्ताक्षर में बदलाव, शब्दों में गलती होना आदि।

चेक पर अब लागू होगा यह नियम
अदालत में मुकदमा चलने पर पीड़ित पक्ष को नुकसान ना हो, इसलिए 20 फीसदी अंतरिम राशि का 60 दिन के भीतर भुगतान किये जाने की अनिवार्यता होगी और अदालत को चेक जारी करने वाले पर जुर्माना लगाने का अधिकार दिया गया है उन्होंने आगे कहा कि चेक बाउंस होने पर सजा की व्यवस्था है, लेकिन इस तरह के मामलों में अपील करने का प्रावधान होने के कारण लंबित मामलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। और इससे चेक की विश्वसनीयता यानी भरोसा कम हो रही है और असुविधाएं बढ़ रही हैं उन्होंने कहा कि इस संशोधन से पीड़ित पक्ष को त्वरित न्याय मिल सकेगा व चेक की विश्वसनीयता और कारोबारी सुगमता बढ़ेगी।

चेक बाउंस होने पर बैंक वसूलते हैं इतना जुर्माना
चेक बाउंस होने पर बैंक करीब 800 रुपये तक का जुर्माना वसूलते हैं वहीँ एसबीआई SBI 500 रुपये प्लस जीएसटी वसूल करता है और अगर किसी तकनीकी खामी की वजह से चेक रिटर्न हुआ तो बैंक कुल 150 रुपये प्लस जीएसटी का चार्ज लेता है।

वहीँ बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) में एक लाख रुपये तक का चेक तकनीकी कारणों से रिटर्न होने पर 250 रुपये और एक लाख से एक करोड़ तक के चेक के लिए 750 रुपये तक का जुर्माना वसूला जाता है और इसी तरह आईसीआईसीआई – ICICI, एक्सिस – Axis और एचडीएफसी HDFC बैंक में भी 500 रुपये से लेकर के 800 रुपये तक का जुर्माना वसूला जाता है।

चेक बाउंस पर दो साल की हो सकती है जेल
चेक बाउंस भारत में नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट, 1881 में हुए संशोधन के बाद सेक्शन 138 के तहत अपराध माना जाता है और चेक बाउंस होने पर दो साल तक की जेल या चेक में भरी राशि का दोगुना तक जुर्माना या दोनों लगाया जा सकता है और इसके तहत अगर अपर्याप्त बैलेंस के चलते चेक बाउंस होता है तो मुकदमा दर्ज किया जा सकता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here