Lockdown: देश की सभी न्यायपालिका का बन्द होना, और वकीलों की रोजी रोटी पर मंडराता संकट!

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कोविड 19 के चलते देश में लॉक डाउन किया गया और देश के समस्त कार्य बंद है जैसे बड़े औद्योगिक कार्यों से लेकर छोटे कारोबार तथा शिक्षण संस्थान से लेकर आवाजाही पर पूर्णतया प्रतिबंध लगाया गया है । इस वैश्विक माहमारी के चलते आज़ादी के बाद से हमारे देश में शायद ऐसा पहली बार हुआ है कि न्यायपालिका के कार्यों को पूरी तरीके से बन्द कर दिया गया हो ।हड़ताले हुई लेकिन पूर्णत देश में इस प्रकार की तालाबंदी पहली बार हुई है ।

इस तालाबंदी का किस पर कितना प्रभाव पड़ रहा है वो सभी के सामने है लेकिन अगर बात सिर्फ और सिर्फ न्यायपालिका की ही करें तो न्यायपालिका हमारे देश की व्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ हैं। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से लेकर जिला अदालतों तक सब बन्द है । इस स्तंभ के मजबूत भाग न्यायाधीश और अधिवक्ता है न्यायाधीशों को सरकार से सैलरी मिलती हैं और वर्तमान हालात में भी मिल रही हैं और बाकी योजनाओं का लाभ भी प्राप्त होता है लेकिन अगर बात वकीलों की करें तो सरकारी वकीलों को छोड़कर 95 प्रतिशत वकीलों को सरकार से कोई मदद नहीं मिल पाती हैं ।

प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले वकीलों को ना तो कोई बैंक लोन देने को तैयार होता है ना कोई किसी प्रकार का करार मिल पाता है यहां तक कि इनका राशन कार्ड भी नहीं बन पाता है । ऐसे में वकीलों के ऊपर रोज़ी रोटी का संकट अा खड़ा हुआ है । वर्तमान हालातो से छटपटाते हुए अधिवक्ता समाज ने सुप्रीम कोर्ट से आस रखते हुए एक याचिका इस विषय में दाख़िल की तो सुप्रीम कोर्ट ने गेंद बार काउंसिल ऑफ इंडिया के पाले में डाल दी । अब बात करें बार काउंसिल ऑफ इंडिया की तो वह स्वयं राज्यो की बार काउंसिल पर सारी जिम्मेदारी छोड़े हुए हैं और राज्यो की बार काउंसिल सरकार का मुंह ताक रही हैं । उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट ने suo moto संज्ञान लेते हुए इस विषय पर सुनवाई की और सरकार को नोटिस जारी करते हुए कहा कि आपने एडवोकेट्स फंड के लिए क्या किया है मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और सिद्धार्थ ने सरकार को फंड बनाकर वकीलों की सहायता करने को कहा लेकिन शायद सरकार अभी भी इस विषय पर गंभीरता से विचार नहीं कर पाई है उत्तर प्रदेश बार काउंसिल ने भी घोषणा की थी वो तीन साल से कम प्रैक्टिस करने वाले वकीलों को सहायता देगी लेकिन जिला मुजफ्फरनगर की बार कौंसिल के किसी अधिवक्ता को अभी तक ये मदद प्राप्त नहीं हुई है

मुजफ्फरनगर बार के पदाधिकरियों के द्वारा उत्तर प्रदेश बार संघ के चेयरमैन द्वारा दी जाने वाली साहयता के नाम पर वकीलों के खातों की डिटेल्स मांगी गई थी परन्तु वहां से भी अभी तक कोई मदद नहीं मिली है जिला मुजफ्फरनगर के महासचिव और अध्यक्ष द्वारा एडीएम प्रशासन अमित कुमार की सहायता से से कुछ खाद्य सामग्री वितरित की जा रही है लेकिन वो इतनी कम है कि 90 प्रतिशत वकीलों ने आत्मसम्मान के चलते वो लेने से साफ इंकार कर दिया है । क्या हमारी सरकार को न्याय के रक्षक और प्रहरी इस अधिवक्ता समाज के लिए कुछ नहीं करना चाहिए था क्या सरकार या बीसीआई या बार काउंसिल ऑफ यूपी या जिला बार संघ को हर प्रकार के फंड से हर निर्माण कार्य को रोककर वकीलों की सहायता नहीं करनी चाहिए क्योंकि ये सदी की सबसे बड़ी त्रासदी है

शाइम हसन (adv) द्वारा लिखा गया लेख

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