Zomato से हुई गलती से मिस्टेक, और भरना पड़ा 55,000 का जुर्माना!

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अपनी रोजमर्रे की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग तामझाम से बचने किए शॉर्टकट रास्ता अपनाते हैं। खाने के शौकिन लोगों के लिए ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप भी एक ऐसा ही शॉर्टकट है, जिसके जरिये आप कभी भी कहीं भी लजीज पकवान का आनंद ले सकते हैं। अगर आप भी ऐसे ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप के दीवाने हैं तो हाँ ये खबर आपके लिए है।
वैसे खबर तो महाराष्ट्र की है, लेकिन आपके लिए भी जरूरी है। महाराष्ट्र के पूने शहर में ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप Zomato ने गलती से veg खाने के ऑर्डर पर Non-veg खाना डिलीवर कर दिया। वैसे तो यह ग्राहक के लिए सोने पर सुहागा वाली बात होगी लेकिन तब जब ग्राहक टंगड़ी तोड़ना पसंद हो। वैसे तो ऐसे केस पर कंपनी ग्राहक को पैसे वापस कर देती है और ग्राहक भी खुश होकर मामले को यहीं रफा-दफा कर देते हैं। लेकिन इस बार थोड़ी सी गलती से मिस्टेक हो गई जिसका कम्पनी को बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ा, क्योंकि इस बार खाना जिस पते पर पहुंचा था एक तो वह साहब शाकाहारी थे, दूसरा वह एक वकील का पता था, बस फिर क्या था वकील साहब को गुस्सा आया और उन्होंने भी Zomato को कठघड़े में लाकर खड़ा कर दिया।
बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच के वकील शानमुख-देशमुख ने दिन भर की उपवास के बाद Zomato से बटर पनीर मसाला ऑर्डर किया था लेकिन रेस्टूरेंट ने गलती से उन्हें चिकन बटर मसाला डिलीवर कर दिया। खाने के दौरान जब उन्हें यह एहसास हुआ किया कि वह पनीर नहीं चिकन खा रहे हैं। उन्होंने डिलीवरी और रेस्टोरेंट को कॉल कर जमकर गुस्सा उतारा। रेस्टोरेंट ने पनीर डिश फिर से भेजने की बात कही। लेकिन जब दूसरा ऑर्डर आया तो वह भी चिकन निकला। अब वकील साहब के सब्र का बांध टूट चुका था। उन्होंने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए दोनों को नोटिस भेजा, जिसका न तो Zomato ने जवाब दिया और न ही रेस्टोरेंट ने।
जवाब न मिलने पर वकील ने उपभोक्ता फोरम में शिकायत की और दोनों पक्षों से 5 लाख रुपए नुकसान और 1 लाख रुपये प्रताड़ना के लिए मांगे। साथ ही दोनों पक्षों से बातचीत की ऑडियो रिकॉडिंग भी जमा की। एक्शन लेते हुए उपभोक्ता फोरम ने Zomato और रेस्टोरेंट वालों पर 55,000 का जुर्माना लगाया, जिसे देने के लिए उन्हें 45 दिन का समय दिया गया। उपभोक्ता फोरम में शिकायत के जवाब में Zomato ने कहा कि यह शिकायत वकील ने कंपनी की छवि धूमिल करने के लिए की। हालांकि कंपनी ने बाद में अपना गलती मान ली और उपभोक्ता को जुर्माना देने को तैयार भी हो गई।

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